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विवेकशीलता संग नियोजन बदलेगा ठांव गेह प्रभाव नेह हृदय बन जाती है मोती छोड़ छोड़ दी चुका आशा बदले जब क्षेत्र निवास प्रवास हूं मीन संदेह़ उत्प्रवासी छोड़ जाते जलती अवधारणा

Hindi छोड़ गेह निज Poems